पहाड़ी बुशैहरी वेबसाइटा दी थारौ स्वागत आ
भगवानै ज़ौ संणसारा औलग औलग तरीकै का चाँणौ दौ आ- शीक भाषा, सौस्कृति, रवाज़, तैईया कैई रूऐ लौग। हौर आदमी तैऊऐ रौच़दौ आ, ज्ञान तैईया प्यारा लै दखेऊआ। ज़ौ औलग औलग नैईआ बल्कि संणसारा लै बाँकौ बचार आ। भाषा तैईया सौस्कृतिऐ ज़रीऐ लौग आपणी पहचाण तैईया साझौ कौरा तैईया तिनी पीढ़ी लै आगै बणाऊआ।
रिवाज़ै मताबक झ़ुड़कै
बुशैहरी सौस्कृति हिमाचली सौबीका पौरणी तैईया बांकी सौस्कृति माझीआ एक आ। ज़ौ हिमाचौलै शिमलै जिलै दी आचा। ज़ौ सौस्कृतै रिवाज़, भाषा तैईया आस्थौ एक एक बांकौ ज़ौड़ आ।
बुशैहरी (पाड़ी) भाषा, नाचणौ, गीत, रौग बंरगैं झ़ुड़कै तैईया खास तयौहार बुशहरा लै एक पहच़ाण दैआ। डौखरै, सैऊऐ बगीच़ै तैईया हाता कै च़ौणे दै औज़ार ज़िदगी लै जरूरी आ। लौग अपणी ज़ागै दैऊ देवती पुजा कौरा। तैईया प्रकृति लै इजंत कौर, ज़ुण इनै पाकै बच़ारा दखैऊआ।
पाड़ धरियाऊ तैईया ज़ागला कै गैरी दी बुशैहरी सौस्कृति प्रकृति सी मिलीजुलीऔ रौआ। ज़ौ नां सिर्प पुराणौ रिवाज़ आ, पर ज़ौ जिऊदौ रिवाज़ आ जुण हिमाचाली शान आ।
सैऊई खेती बुशैहरी लौगौ एक खास कामा माझीआ एक आ। बुशैहर ज़ागी ठाड़ौ मौसम तैईया उमजाऊ माटौ सैऊ लाणा लै ठीक आ। शीक लौग ईदरै सैऊ मैतै आसरौ आ।
लौग सौल बौर सैऊऐ बुट ला, सातै तिनी दैख रैख कौरणा लै तैईया मौसमै सौही बौक्ता दी सैऊ च़ौड़ना लै कौड़ी मैनंत कौरा। बुशैहर लाकै लौग आपणी सैऊ स्वादा लै मशहूर आ। सैऊ बगीचै नां सिर्प गौर चलाऊआ, बौल्कि हिमाचली सरकारा लै बी मौज़त कौरा।
बुशैहरी भाषा रो मानचित्र