पहाड़ी बुशैहरी नृत्य
पहाड़ी बुशहरी नृत्य सरल, लयबद्ध और प्रकृति, त्योहारों तथा सामुदायिक जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह बुशहरी संस्कृति की समृद्धि को दर्शाता है।
समूह आधारित नृत्य: यह नृत्य प्रायः पुरुषों और महिलाओं द्वारा मिलकर वृत्त या पंक्तियों में किया जाता है। धीमी और सौम्य गतियाँ: इसके कदम कोमल होते हैं और लोक संगीत की लय के अनुरूप होते हैं। पारंपरिक संगीत: नागाड़ा, ढोल, करनाल, शहनाई और रणसिंघा जैसे वाद्य यंत्रों के साथ किया जाता है। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा: नर्तक-नर्तकियाँ कुल्लवी, बुशहरी और किन्नौरी परिधान, टोपी और आभूषण पहनते हैं। सामुदायिक अभिव्यक्ति: यह नृत्य मेलों, त्योहारों, शादियों और फसल उत्सवों के अवसर पर किया जाता है।